कुछ सवाल है जिनको समझना बेहद जरुरी है :
१) अरविन्द बोलते है पोलिस आपना काम नहीं करती , FIR नहीं लिखती। उनको सस्पेंड करना चाहिए। अगर ऐसा ठीक है तो अपने कानून मंत्री जी सस्पेंड क्यों नहीं होने चाहिए जबकि कोर्ट ने खुद उनके खिलाफ FIR का आदेश दिया है । यहाँ आपकी ईमानदारी को क्या हो जाता है ?
२) आप बोलते है पोलिसे को मेरी सरकार होना चाहिए , पोलिसे को सरकार का डर होना चाहिए | अगर ऐसा है तो सीबीआई क्यों centre के अधीन नहीं होनी चाहिए | ये दो तरफहा बात क्यों ? आप डर कि बात करते है , तो फिर आप मैं और उतर प्रदेश , हरियाना , बिहार जैसे सरकार मैं क्या फरक है |
३) मंत्री जी के मामले मैं आप बोलते है कोर्ट का जाँच पुरी होने दे , फिर पोलिस के मामले मैं आप कैसे खुद जज बन कर फैसला देने लगे |
४) कुछ लोग तर्क देते है खिचड़ी एक्सटेंशन के लोग बड़े खुश है तो मैं उनको याद दिला दु दुर्गा सक्ति नागपाल के सस्पेंशन मै भी वहा के लोग बड़े खुश थे। अगर लोगो के खुस होने पर आप तय करेंगे क्या सही या गलत है तो ये सबके लिए त्रासदी का समय है ।
५) कभी समय होने पर आपनी भाषा को खुद सुन लीजियेगा , आप वो अब बिलकुल नहीं जो थे | आप भी गमंड मे चुर नेताओ कि भाषा बोलने लगे है।
आप आम आदमी पार्टी बताते है फिर कैसे अचानक सब बड़े बड़े लोग अपना सारा काम छोड़ के आपके साथ हो जाते है ये तब कहा थे जब अन्न का आंदोलन चल रहा था। ये मौका परस्त लोग आपको अचानक देश भक्त कैसे लगने लगे।
अरविंद जी आप आम थे अब है नहीं , मुझे दुःख है मै कैसे आपके साथ हो गया ।
१) अरविन्द बोलते है पोलिस आपना काम नहीं करती , FIR नहीं लिखती। उनको सस्पेंड करना चाहिए। अगर ऐसा ठीक है तो अपने कानून मंत्री जी सस्पेंड क्यों नहीं होने चाहिए जबकि कोर्ट ने खुद उनके खिलाफ FIR का आदेश दिया है । यहाँ आपकी ईमानदारी को क्या हो जाता है ?
२) आप बोलते है पोलिसे को मेरी सरकार होना चाहिए , पोलिसे को सरकार का डर होना चाहिए | अगर ऐसा है तो सीबीआई क्यों centre के अधीन नहीं होनी चाहिए | ये दो तरफहा बात क्यों ? आप डर कि बात करते है , तो फिर आप मैं और उतर प्रदेश , हरियाना , बिहार जैसे सरकार मैं क्या फरक है |
३) मंत्री जी के मामले मैं आप बोलते है कोर्ट का जाँच पुरी होने दे , फिर पोलिस के मामले मैं आप कैसे खुद जज बन कर फैसला देने लगे |
४) कुछ लोग तर्क देते है खिचड़ी एक्सटेंशन के लोग बड़े खुश है तो मैं उनको याद दिला दु दुर्गा सक्ति नागपाल के सस्पेंशन मै भी वहा के लोग बड़े खुश थे। अगर लोगो के खुस होने पर आप तय करेंगे क्या सही या गलत है तो ये सबके लिए त्रासदी का समय है ।
५) कभी समय होने पर आपनी भाषा को खुद सुन लीजियेगा , आप वो अब बिलकुल नहीं जो थे | आप भी गमंड मे चुर नेताओ कि भाषा बोलने लगे है।
आप आम आदमी पार्टी बताते है फिर कैसे अचानक सब बड़े बड़े लोग अपना सारा काम छोड़ के आपके साथ हो जाते है ये तब कहा थे जब अन्न का आंदोलन चल रहा था। ये मौका परस्त लोग आपको अचानक देश भक्त कैसे लगने लगे।
अरविंद जी आप आम थे अब है नहीं , मुझे दुःख है मै कैसे आपके साथ हो गया ।